हाट बाट घर गलीं अथाईं

चौपाई २, दोहा ११ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

हाट बाट घर गलीं अथाईं। कहहिं परसपर लोग लोगाईं॥ कालि लगन भलि केतिक बारा। पूजिहि बिधि अभिलाषु हमारा॥ २ ॥

अर्थ

बाजार, रास्ते, घर, गली और चबूतरों पर (जहाँ-तहाँ) पुरुष और स्त्री आपस में यही कहते हैं कि कल वह शुभ लग्न (मुहूर्त) कितने समय है जब विधाता हमारी अभिलाषा पूरी करेंगे।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की प्रार्थना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ११ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामराज्याभिषेक की तैयारी और देवताओं द्वारा सरस्वतीजी से वनगमन हेतु प्रार्थना का वर्णन है।

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राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की प्रार्थना