बहुत कीन्ह प्रभु लखन सियँ नहिं

दोहा १०२ · अयोध्याकाण्ड

दोहा पाठ

बहुत कीन्ह प्रभु लखन सियँ नहिं कछु केवटु लेइ। बिदा कीन्ह करुनायतन भगति बिमल बरु देइ॥ १०२ ॥

अर्थ

प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण और सीताजी ने बहुत आग्रह किया, पर केवट कुछ नहीं लेता। तब करुणाके धाम भगवान् श्रीरामचन्द्रजी ने निर्मल भक्ति का वरदान देकर उसे विदा किया।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “केवट का प्रेम और गंगा पार” प्रकरण का दोहा १०२ है। इस प्रकरण में केवट द्वारा प्रभु के चरण पखारने और श्रीराम-सीता-लक्ष्मण को गंगा पार उतारने का वर्णन है।

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केवट का प्रेम और गंगा पार