बहुरि लखन पायन्ह सोइ लागा

चौपाई २, दोहा १११ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

बहुरि लखन पायन्ह सोइ लागा। लीन्ह उठाइ उमगि अनुरागा॥ पुनि सिय चरन धूरि धरि सीसा। जननि जानि सिसु दीन्हि असीसा॥ २ ॥

अर्थ

फिर वह लक्ष्मणजी के चरणों लगा। उन्होंने प्रेम से उमड़कर उसको उठा लिया। फिर उसने सीताजी की चरणधूलि को अपने सिर पर धारण किया। माता सीताजी ने भी उसको अपना छोटा बच्चा जानकर आशीर्वाद दिया।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “वन मार्ग में तापस से भेंट” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १११ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में वन मार्ग में एक तेजस्वी तापस और श्रीराम के मिलन तथा भक्ति-प्रेम के प्रकटन का वर्णन है।

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वन मार्ग में तापस से भेंट