अवध तहाँ जहँ राम निवासू

चौपाई २, दोहा ७४ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

अवध तहाँ जहँ राम निवासू। तहँइँ दिवसु जहँ भानु प्रकासू॥ जौं पै सीय रामु बन जाहीं। अवध तुम्हार काजु कछु नाहीं॥ २ ॥

अर्थ

जहाँ श्रीरामजी का निवास हो वहीं अयोध्या है। जहाँ सूर्य का प्रकाश हो वहीं दिन है। यदि निश्चय ही सीता-राम वन को जाते हैं तो अयोध्या में तुम्हारा कुछ भी काम नहीं है।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीलक्ष्मण-सुमित्रा-संवाद” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ७४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में लक्ष्मण को सुमित्रा की राम-सीता सेवा हेतु प्रेरणा और आशीर्वाद का वर्णन है।

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श्रीलक्ष्मण-सुमित्रा-संवाद