अस कहि पग परि पेम अति
अस कहि पग परि पेम अति
दोहा २८५ · अयोध्याकाण्ड
दोहा पाठ
अस कहि पग परि पेम अति सिय हित बिनय सुनाइ। सिय समेत सियमातु तब चली सुआयसु पाइ॥ २८५ ॥
अर्थ
ऐसा कहकर बड़े प्रेम से पैरों पड़कर सीताजी [को साथ भेजने] के लिये विनती करके और सुन्दर आज्ञा पाकर तब सीताजी समेत सीताजी की माता डेरे को चलीं।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “कौसल्या-सुनयना संवाद, सीता का शील” प्रकरण का दोहा २८५ है। इस प्रकरण में कौसल्या-सुनयना संवाद में श्रीसीताजी के शील, धैर्य और पतिव्रत धर्म की महिमा का वर्णन है।
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कौसल्या-सुनयना संवाद, सीता का शील