प्रिय परिजनहि मिली बैदेही
प्रिय परिजनहि मिली बैदेही
चौपाई १, दोहा २८६ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
प्रिय परिजनहि मिली बैदेही। जो जेहि जोगु भाँति तेहि तेही॥ तापस बेष जानकी देखी। भा सबु बिकल बिषाद बिसेषी॥ १ ॥
अर्थ
जानकीजी अपने प्यारे कुटुम्बियों से--जो जिस योग्य था, उससे उसी प्रकार मिलीं। जानकीजी को तपस्विनी के वेष में देखकर सभी शोक से अत्यन्त व्याकुल हो गये।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “कौसल्या-सुनयना संवाद, सीता का शील” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २८६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में कौसल्या-सुनयना संवाद में श्रीसीताजी के शील, धैर्य और पतिव्रत धर्म की महिमा का वर्णन है।
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कौसल्या-सुनयना संवाद, सीता का शील