अमर नाग नर राम बाहुबल

चौपाई ४, दोहा २८५ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

अमर नाग नर राम बाहुबल। सुख बसिहहिं अपनें अपनें थल॥ यह सब जागबलिक कहि राखा। देबि न होइ मुधा मुनि भाषा॥ ४ ॥

अर्थ

देवता, नाग और मनुष्य सब श्रीरामचन्द्रजी की भुजाओं के बल पर अपने-अपने स्थानों (लोकों) में सुखपूर्वक बसेंगे। यह सब याज्ञवल्क्य मुनि ने पहले ही से कह रखा है। हे देवि! मुनि का कथन व्यर्थ (झूठा) नहीं हो सकता।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “कौसल्या-सुनयना संवाद, सीता का शील” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २८५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में कौसल्या-सुनयना संवाद में श्रीसीताजी के शील, धैर्य और पतिव्रत धर्म की महिमा का वर्णन है।

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कौसल्या-सुनयना संवाद, सीता का शील