अस कहि मातु भरतु हियँ लाए

चौपाई ३, दोहा १६९ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

अस कहि मातु भरतु हियँ लाए। थन पय स्रवहिं नयन जल छाए॥ करत बिलाप बहुत एहि भाँती। बैठेहिं बीति गई सब राती॥ ३ ॥

अर्थ

ऐसा कहकर माता कौसल्याजी ने भरतजी को हृदय से लगा लिया। उनके स्तनों से दूध बहने लगा और नेत्रों में [प्रेमाश्रुओं का] जल छा गया। इस प्रकार बहुत विलाप करते हुए सारी रात बैठे-ही-बैठे बीत गयी।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरत-कौसल्या संवाद और दशरथ की अंत्येष्टि” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १६९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत-कौसल्या मिलन, करुण संवाद और गुरु वसिष्ठ के मार्गदर्शन में दशरथ की अंत्येष्टि का वर्णन है।

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भरत-कौसल्या संवाद और दशरथ की अंत्येष्टि