अस बिचारि केहि देइअ दोसू

चौपाई १, दोहा १७२ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

अस बिचारि केहि देइअ दोसू। ब्यरथ काहि पर कीजिअ रोसू॥ तात बिचारु करहु मन माहीं। सोच जोगु दसरथु नृपु नाहीं॥ १ ॥

अर्थ

ऐसा विचारकर किसे दोष दिया जाय? और व्यर्थ किस पर क्रोध किया जाय? हे तात! मन में विचार करो। राजा दशरथ सोच करने के योग्य नहीं हैं।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “वसिष्ठ-भरत संवाद, चित्रकूट यात्रा की तैयारी” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १७२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में गुरु वसिष्ठ द्वारा भरत को धर्म-उपदेश और चित्रकूट यात्रा की तैयारी का वर्णन है।

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वसिष्ठ-भरत संवाद, चित्रकूट यात्रा की तैयारी