अंब एक दुखु मोहि बिसेषी
अंब एक दुखु मोहि बिसेषी
चौपाई ३, दोहा ४२ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
अंब एक दुखु मोहि बिसेषी। निपट बिकल नरनायकु देखी॥ थोरिहिं बात पितहि दुख भारी। होति प्रतीति न मोहि महतारी॥ ३ ॥
अर्थ
हे माता! मुझे एक ही दुःख विशेष रूप से हो रहा है, वह महाराज को अत्यन्त व्याकुल देखकर। इस थोड़ी-सी बात के लिये ही पिताजी को इतना भारी दुःख हो, हे माता! मुझे इस बात पर विश्वास नहीं होता।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-कैकेयी-संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ४२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा कैकेयी की आज्ञा को सहज भाव से स्वीकार कर वनवास के लिए तत्पर होने का वर्णन है।
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श्रीराम-कैकेयी-संवाद