रउरे अंग जोगु जग को है
रउरे अंग जोगु जग को है
चौपाई ३, दोहा २८५ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
रउरे अंग जोगु जग को है। दीप सहाय कि दिनकर सोहै॥ रामु जाइ बनु करि सुर काजू। अचल अवधपुर करिहहिं राजू॥ ३ ॥
अर्थ
आपके सहायक होने योग्य जगत में कौन है ? दीपक सूर्य की सहायता करने जाकर कहीं शोभा पा सकता है? श्रीरामचन्द्रजी वन में जाकर देवताओं का कार्य करके अवधपुरी में अचल राज्य करेंगे।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “कौसल्या-सुनयना संवाद, सीता का शील” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २८५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में कौसल्या-सुनयना संवाद में श्रीसीताजी के शील, धैर्य और पतिव्रत धर्म की महिमा का वर्णन है।
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कौसल्या-सुनयना संवाद, सीता का शील