आइ बना भल सकल समाजू
आइ बना भल सकल समाजू
चौपाई ३, दोहा २३० के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
आइ बना भल सकल समाजू। प्रगट करउँ रिस पाछिल आजू॥ जिमि करि निकर दलइ मृगराजू। लेइ लपेटि लवा जिमि बाजू॥ ३ ॥
अर्थ
अच्छा हुआ जो सारा समाज आकर एकत्र हो गया। आज मैं पिछला सब क्रोध प्रकट करूँगा। जैसे सिंह हाथियों के झुंड को कुचल डालता है और बाज जैसे लवे को लपेट में ले लेता है।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “सीता का स्वप्न, भरत के आगमन की सूचना, लक्ष्मण का क्रोध” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २३० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीताजी के अशुभ स्वप्न, भरतजी के आगमन की सूचना और लक्ष्मणजी के क्रोध का वर्णन है।
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सीता का स्वप्न, भरत के आगमन की सूचना, लक्ष्मण का क्रोध