आजु राम सेवक जसु लेऊँ

चौपाई २, दोहा २३० के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

आजु राम सेवक जसु लेऊँ। भरतहि समर सिखावन देऊँ॥ राम निरादर कर फलु पाई। सोवहुँ समर सेज दोउ भाई॥ २ ॥

अर्थ

आज मैं श्रीराम (आप) का सेवक होने का यश लूँ और भरत को संग्राम में शिक्षा दूँ। श्रीरामचन्द्रजी (आप) के निरादर का फल पाकर दोनों भाई रणशय्या पर सोवें!

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “सीता का स्वप्न, भरत के आगमन की सूचना, लक्ष्मण का क्रोध” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २३० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीताजी के अशुभ स्वप्न, भरतजी के आगमन की सूचना और लक्ष्मणजी के क्रोध का वर्णन है।

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सीता का स्वप्न, भरत के आगमन की सूचना, लक्ष्मण का क्रोध