तैसेहिं भरतहि सेन समेता
तैसेहिं भरतहि सेन समेता
चौपाई ४, दोहा २३० के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
तैसेहिं भरतहि सेन समेता। सानुज निदरि निपातउँ खेता॥ जौं सहाय कर संकरु आई। तौ मारउँ रन राम दोहाई॥ ४ ॥
अर्थ
वैसे ही भरत को सेना समेत और छोटे भाई सहित तिरस्कार करके मैदान में पछाड़ूँगा। यदि शंकरजी भी आकर उनकी सहायता करें, तो भी, मुझे रामजी की सौगन्ध है, मैं उन्हें युद्ध में [अवश्य] मार डालूँगा (छोड़ूँगा नहीं)।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “सीता का स्वप्न, भरत के आगमन की सूचना, लक्ष्मण का क्रोध” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २३० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीताजी के अशुभ स्वप्न, भरतजी के आगमन की सूचना और लक्ष्मणजी के क्रोध का वर्णन है।
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सीता का स्वप्न, भरत के आगमन की सूचना, लक्ष्मण का क्रोध