उर सीस भुज कर चरन
उर सीस भुज कर चरन
छन्द ५, दोहा २० के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
छन्द पाठ
उर सीस भुज कर चरन। जहँ तहँ लगे महि परन॥ चिक्करत लागत बान। धर परत कुधर समान॥ ५ ॥
अर्थ
उनकी छाती, सिर, भुजा, हाथ और पैर जहाँ-तहाँ पृथ्वी पर गिरने लगे। बाण लगते ही वे चिल्लाते हैं। धड़ पहाड़ के समान गिर रहे हैं।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “शूर्पणखा कथा, खर-दूषण वध” प्रकरण का छन्द ५, दोहा २० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शूर्पणखा की दुष्टता, उसके उकसावे पर खर-दूषण का श्रीराम से युद्ध और उनका संहार का वर्णन है।
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शूर्पणखा कथा, खर-दूषण वध