रिपु परम कोपे जानि

छन्द ४, दोहा २० के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

छन्द पाठ

रिपु परम कोपे जानि। प्रभु धनुष सर संधानि॥ छाँड़े बिपुल नाराच। लगे कटन बिकट पिसाच॥ ४ ॥

अर्थ

शत्रु को अत्यन्त कुपित जानकर प्रभु ने धनुष पर बाण चढ़ाकर बहुत-से बाण छोड़े, जिनसे भयानक राक्षस कटने लगे।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “शूर्पणखा कथा, खर-दूषण वध” प्रकरण का छन्द ४, दोहा २० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शूर्पणखा की दुष्टता, उसके उकसावे पर खर-दूषण का श्रीराम से युद्ध और उनका संहार का वर्णन है।

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शूर्पणखा कथा, खर-दूषण वध