भट कटत तन सत खंड
भट कटत तन सत खंड
छन्द ६, दोहा २० के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
छन्द पाठ
भट कटत तन सत खंड। पुनि उठत करि पाषंड॥ नभ उड़त बहु भुज मुंड। बिनु मौलि धावत रुंड॥ ६ ॥
अर्थ
योद्धाओं के शरीर कटकर सैकड़ों टुकड़े हो जाते हैं। वे फिर माया करके उठ खड़े होते हैं। आकाश में बहुत-सी भुजाएँ और सिर उड़ रहे हैं तथा बिना सिर के धड़ दौड़ रहे हैं।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “शूर्पणखा कथा, खर-दूषण वध” प्रकरण का छन्द ६, दोहा २० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शूर्पणखा की दुष्टता, उसके उकसावे पर खर-दूषण का श्रीराम से युद्ध और उनका संहार का वर्णन है।
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शूर्पणखा कथा, खर-दूषण वध