उमा राम गुन गूढ़ पंडित मुनि
उमा राम गुन गूढ़ पंडित मुनि
सोरठा ० · अरण्यकाण्ड
सोरठा पाठ
उमा राम गुन गूढ़ पंडित मुनि पावहिं बिरति। पावहिं मोह बिमूढ़ जे हरि बिमुख न धर्म रति॥ ० ॥
अर्थ
हे पार्वती! श्रीरामजी के गुण गूढ़ हैं, पण्डित और मुनि उन्हें समझकर वैराग्य प्राप्त करते हैं। परन्तु जो हरि से विमुख हैं और जिन्हें धर्म में रति नहीं है, वे मोहित होकर भ्रम में पड़ जाते हैं।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “जयन्त की कुटिलता और फलप्राप्ति” प्रकरण का सोरठा ० है। इस प्रकरण में जयन्त द्वारा कौए का रूप धरकर सीताजी को कष्ट देने और श्रीराम के बाण से भयभीत होकर शरण लेने का वर्णन है।
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जयन्त की कुटिलता और फलप्राप्ति