सान्द्रानन्द पयोद सौभगतनुं पीताम्बरं

श्लोक २ · अरण्यकाण्ड

श्लोक पाठ

सान्द्रानन्दपयोदसौभगतनुं पीताम्बरं सुन्दरं पाणौ बाणशरासनं कटिलसत्तूणीरभारं वरम्‌। राजीवायतलोचनं धृतजटाजूटेन संशोभितं सीतालक्ष्मणसंयुतं पथिगतं रामाभिरामं भजे॥ २ ॥

अर्थ

जिनका शरीर जलयुक्त मेघों के समान सुन्दर (श्यामवर्ण) एवं आनन्दघन है, जो सुन्दर पीताम्बर धारण किये हैं, जिनके हाथों में बाण और धनुष हैं, कमर उत्तम तरकस के भार से सुशोभित है, कमल के समान विशाल नेत्र हैं और मस्तक पर जटाजूट धारण किये हैं, उन अत्यन्त शोभायमान श्रीसीताजी और लक्ष्मणजी सहित पथ में चलते हुए आनन्द देनेवाले श्रीरामचन्द्रजी को मैं भजता हूँ।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “मंगलाचरण” प्रकरण का श्लोक २ है। इस प्रकरण में अरण्यकाण्ड के आरंभ में शिव, श्रीराम, सीता और गुरु चरणों की वंदना का वर्णन है।

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मंगलाचरण