उमा कहउँ मैं अनुभव अपना
उमा कहउँ मैं अनुभव अपना
चौपाई ३, दोहा ३९ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
चौपाई पाठ
उमा कहउँ मैं अनुभव अपना। सत हरि भजनु जगत सब सपना॥ पुनि प्रभु गए सरोबर तीरा। पंपा नाम सुभग गंभीरा॥ ३ ॥
अर्थ
हे उमा! मैं तुम्हें अपना अनुभव कहता हूँ--हरि का भजन ही सत्य है, यह सारा जगत् तो स्वप्न [की भाँति झूठा] है। फिर प्रभु श्रीरामजी पंपा नामक सुंदर और गहरे सरोवर के तीर पर गये।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “शबरी पर कृपा, नवधा भक्ति” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शबरी पर प्रभु की कृपा, नवधा भक्ति उपदेश और पंपासर प्रस्थान का वर्णन है।
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शबरी पर कृपा, नवधा भक्ति