क्रोध मनोज लोभ मद माया

चौपाई २, दोहा ३९ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

क्रोध मनोज लोभ मद माया। छूटहिं सकल राम कीं दाया॥ सो नर इंद्रजाल नहिं भूला। जा पर होइ सो नट अनुकूला॥ २ ॥

अर्थ

क्रोध, काम, लोभ, मद और माया-ये सभी श्रीरामजी की दया से छूट जाते हैं। वह नट (नटराजभगवान्) जिस पर प्रसन्न होता है, वह मनुष्य इन्द्रजाल (माया) में नहीं भूलता।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “शबरी पर कृपा, नवधा भक्ति” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शबरी पर प्रभु की कृपा, नवधा भक्ति उपदेश और पंपासर प्रस्थान का वर्णन है।

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शबरी पर कृपा, नवधा भक्ति