तुरतहिं रुचिर रूप तेहिं पावा

चौपाई ४, दोहा ७ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

तुरतहिं रुचिर रूप तेहिं पावा। देखि दुखी निज धाम पठावा॥ पुनि आए जहँ मुनि सरभंगा। सुंदर अनुज जानकी संगा॥ ४ ॥

अर्थ

[ श्रीरामजी के हाथ से मरते ही] उसने तुरंत सुन्दर (दिव्य) रूप प्राप्त कर लिया। दुखी देखकर प्रभु ने उसे अपने परम धाम को भेज दिया। फिर वे सुन्दर छोटे भाई लक्ष्मणजी और सीताजी के साथ वहाँ आये जहाँ मुनि शरभंगजी थे।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “विराध वध और शरभंग प्रसंग” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा विराध वध और शरभंग मुनि को दर्शन देकर परम गति प्रदान करने का वर्णन है।

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विराध वध और शरभंग प्रसंग