देखि राम मुख पंकज मुनिबर लोचन
देखि राम मुख पंकज मुनिबर लोचन
दोहा ७ · अरण्यकाण्ड
दोहा पाठ
देखि राम मुख पंकज मुनिबर लोचन भृंग। सादर पान करत अति धन्य जन्म सरभंग॥ ७ ॥
अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी का मुखकमल देखकर मुनिश्रेष्ठ के नेत्ररूपी भौंरे अत्यन्त आदरपूर्वक उसका [मकरन्दरस] पान कर रहे हैं। शरभंगजी का जन्म धन्य है।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “विराध वध और शरभंग प्रसंग” प्रकरण का दोहा ७ है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा विराध वध और शरभंग मुनि को दर्शन देकर परम गति प्रदान करने का वर्णन है।
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विराध वध और शरभंग प्रसंग