जहँ जहँ जाहिं देव रघुराया

चौपाई ३, दोहा ७ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

जहँ जहँ जाहिं देव रघुराया। करहिं मेघ तहँ तहँ नभ छाया॥ मिला असुर बिराध मग जाता। आवतहीं रघुबीर निपाता॥ ३ ॥

अर्थ

जहाँ-जहाँ देव श्रीरघुनाथजी जाते हैं, वहाँ-वहाँ बादल आकाश में छाया करते जाते हैं। रास्ते में जाते हुए विराध राक्षस मिला। सामने आते ही श्रीरघुनाथजी ने उसे मार डाला।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “विराध वध और शरभंग प्रसंग” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा विराध वध और शरभंग मुनि को दर्शन देकर परम गति प्रदान करने का वर्णन है।

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विराध वध और शरभंग प्रसंग