तेहिं पूछा सब कहेसि बुझाई
तेहिं पूछा सब कहेसि बुझाई
चौपाई २, दोहा १८ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
चौपाई पाठ
तेहिं पूछा सब कहेसि बुझाई। जातुधान सुनि सेन बनाई॥ धाए निसिचर निकर बरूथा। जनु सपच्छ कज्जल गिरि जूथा॥ २ ॥
अर्थ
उन्होंने पूछा, तब शूर्पणखा ने सब समझाकर कहा। सब सुनकर राक्षसों ने सेना तैयार की। राक्षस-समूह झुंड-के-झुंड दौड़े। मानो पंखधारी काजल के पर्वतों का झुंड हो।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “शूर्पणखा कथा, खर-दूषण वध” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शूर्पणखा की दुष्टता, उसके उकसावे पर खर-दूषण का श्रीराम से युद्ध और उनका संहार का वर्णन है।
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शूर्पणखा कथा, खर-दूषण वध