नाना बाहन नानाकारा

चौपाई ३, दोहा १८ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

नाना बाहन नानाकारा। नानायुध धर घोर अपारा॥ सूपनखा आगें करि लीनी। असुभ रूप श्रुति नासा हीनी॥ ३ ॥

अर्थ

वे अनेकों प्रकार की सवारियों पर चढ़े हुए तथा अनेकों आकार के हैं। वे अपार हैं और अनेकों प्रकार के असंख्य भयानक हथियार धारण किए हुए हैं। उन्होंने नाक-कान हीन, अशुभ रूपवाली शूर्पणखा को आगे कर लिया।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “शूर्पणखा कथा, खर-दूषण वध” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शूर्पणखा की दुष्टता, उसके उकसावे पर खर-दूषण का श्रीराम से युद्ध और उनका संहार का वर्णन है।

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शूर्पणखा कथा, खर-दूषण वध