तब सक्रोध निसिचर खिसिआना
तब सक्रोध निसिचर खिसिआना
चौपाई ११, दोहा २९ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
चौपाई पाठ
तब सक्रोध निसिचर खिसिआना। काढ़ेसि परम कराल कृपाना॥ काटेसि पंख परा खग धरनी। सुमिरि राम करि अदभुत करनी॥ ११ ॥
अर्थ
तब खिसियाये हुए रावण ने क्रोधयुक्त होकर अत्यन्त भयानक कटार निकाली और उससे जटायु के पंख काट डाले। पक्षी (जटायु) श्रीरामजी की अद्भुत लीलाका स्मरण करके पृथ्वी पर गिर पड़ा।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “जटायु-रावण युद्ध” प्रकरण का चौपाई ११, दोहा २९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में जटायु द्वारा सीताजी की रक्षा हेतु रावण से वीरतापूर्ण युद्ध और घायल होने का वर्णन है।
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जटायु-रावण युद्ध