धरि कच बिरथ कीन्ह महि गिरा
धरि कच बिरथ कीन्ह महि गिरा
चौपाई १०, दोहा २९ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
चौपाई पाठ
धरि कच बिरथ कीन्ह महि गिरा। सीतहि राखि गीध पुनि फिरा॥ चोचन्ह मारि बिदारेसि देही। दंड एक भइ मुरुछा तेही॥ १० ॥
अर्थ
उसने [रावण के] बाल पकड़कर उसे रथ के नीचे उतार लिया, रावण पृथ्वी पर गिर पड़ा। गीध सीताजी को एक ओर बैठाकर फिर लौटा और चोंचों से मार-मारकर रावण के शरीर को विदीर्ण कर डाला। इससे उसे एक दण्ड के लिए मूर्छा हो गयी।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “जटायु-रावण युद्ध” प्रकरण का चौपाई १०, दोहा २९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में जटायु द्वारा सीताजी की रक्षा हेतु रावण से वीरतापूर्ण युद्ध और घायल होने का वर्णन है।
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जटायु-रावण युद्ध