सीतहि जान चढ़ाइ बहोरी

चौपाई १२, दोहा २९ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

सीतहि जान चढ़ाइ बहोरी। चला उताइल त्रास न थोरी॥ करति बिलाप जाति नभ सीता। ब्याध बिबस जनु मृगी सभीता॥ १२ ॥

अर्थ

सीताजी को फिर रथ पर चढ़ाकर रावण बड़ी उतावली के साथ चला, उसे भय कम न था। सीताजी आकाश में विलाप करती हुई जा रही हैं। मानो व्याध के वश में पड़ी हुई कोई भयभीत हिरनी हो!

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “जटायु-रावण युद्ध” प्रकरण का चौपाई १२, दोहा २९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में जटायु द्वारा सीताजी की रक्षा हेतु रावण से वीरतापूर्ण युद्ध और घायल होने का वर्णन है।

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जटायु-रावण युद्ध