तब मारीच हृदयँ अनुमाना

चौपाई २, दोहा २६ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

तब मारीच हृदयँ अनुमाना। नवहि बिरोधें नहिं कल्याना॥ सस्त्री मर्मी प्रभु सठ धनी। बैद बंदि कबि भानस गुनी॥ २ ॥

अर्थ

तब मारीच ने हृदय में अनुमान किया कि शस्त्री (शस्त्रधारी), मर्मी (भेद जाननेवाला), प्रभु, सठ, धनी, वैद, बंदी, कवि और भानस गुनी--इन नौ व्यक्तियों से विरोध करने में कल्याण (कुशल) नहीं होता।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “स्वर्ण मृग और मारीच वध” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मारीच का स्वर्ण मृग रूप धारण और श्रीराम द्वारा उसका वध तथा मोक्ष-प्रदान का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
स्वर्ण मृग और मारीच वध