जाहु भवन कुल कुसल बिचारी
जाहु भवन कुल कुसल बिचारी
चौपाई १, दोहा २६ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
चौपाई पाठ
जाहु भवन कुल कुसल बिचारी। सुनत जरा दीन्हिसि बहु गारी॥ गुरु जिमि मूढ़ करसि मम बोधा। कहु जग मोहि समान को जोधा॥ १ ॥
अर्थ
अतः अपने कुल की कुशल विचारकर आप घर लौट जाइये। यह सुनकर रावण जल उठा और उसने बहुत-सी गालियाँ दीं (दुर्वचन कहे)। [कहा--] अरे मूर्ख ! तू गुरु की तरह मुझे ज्ञान सिखाता है? बता तो, संसार में मेरे समान योद्धा कौन है ?।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “स्वर्ण मृग और मारीच वध” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मारीच का स्वर्ण मृग रूप धारण और श्रीराम द्वारा उसका वध तथा मोक्ष-प्रदान का वर्णन है।
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स्वर्ण मृग और मारीच वध