सुरपति सुत धरि बायस बेषा
सुरपति सुत धरि बायस बेषा
चौपाई ३, दोहा १ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
चौपाई पाठ
सुरपति सुत धरि बायस बेषा। सठ चाहत रघुपति बल देखा॥ जिमि पिपीलिका सागर थाहा। महा मंदमति पावन चाहा॥ ३ ॥
अर्थ
देवराज इन्द्र का पुत्र जयन्त कौए का रूप धरकर श्रीरघुनाथजी का बल देखना चाहता है। जैसे महान् मन्दबुद्धि चींटी समुद्र का थाह पाना चाहे।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “जयन्त की कुटिलता और फलप्राप्ति” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में जयन्त द्वारा कौए का रूप धरकर सीताजी को कष्ट देने और श्रीराम के बाण से भयभीत होकर शरण लेने का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
जयन्त की कुटिलता और फलप्राप्ति