सीता चरन चोंच हति भागा

चौपाई ४, दोहा १ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

सीता चरन चोंच हति भागा। मूढ़ मंदमति कारन कागा॥ चला रुधिर रघुनायक जाना। सींक धनुष सायक संधाना॥ ४ ॥

अर्थ

वह मूढ़, मन्दबुद्धि कारणवश बना हुआ कौआ सीताजी के चरणों में चोंच मारकर भागा। जब रक्त बह चला, तब श्रीरघुनाथजी ने जाना और धनुष पर सरकंडे का बाण सन्धान किया।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “जयन्त की कुटिलता और फलप्राप्ति” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में जयन्त द्वारा कौए का रूप धरकर सीताजी को कष्ट देने और श्रीराम के बाण से भयभीत होकर शरण लेने का वर्णन है।

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जयन्त की कुटिलता और फलप्राप्ति