सूपनखहि समुझाइ करि बल बोलेसि बहु
सूपनखहि समुझाइ करि बल बोलेसि बहु
दोहा २२ · अरण्यकाण्ड
दोहा पाठ
सूपनखहि समुझाइ करि बल बोलेसि बहु भाँति। गयउ भवन अति सोचबस नीद परइ नहिं राति॥ २२ ॥
अर्थ
उसने शूर्पणखाको समझाकर अपने बलका बहुत प्रकार से बखान किया; [पर मनमें] वह अत्यन्त चिन्तावश होकर अपने भवन गया। रात में नींद नहीं पड़ती थी।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “शूर्पणखा का रावण के पास जाना, माया सीता” प्रकरण का दोहा २२ है। इस प्रकरण में शूर्पणखा द्वारा रावण में दुराशा जगाना, सीता का अग्नि प्रवेश और माया सीता का प्राकट्य का वर्णन है।
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शूर्पणखा का रावण के पास जाना, माया सीता