सुर नर असुर नाग खग माहीं

चौपाई १, दोहा २३ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

सुर नर असुर नाग खग माहीं। मोरे अनुचर कहँ कोउ नाहीं॥ खर दूषन मोहि सम बलवंता। तिन्हहि को मारइ बिनु भगवंता॥ १ ॥

अर्थ

[वह मन-ही-मन विचार करने लगा--] देवता, मनुष्य, असुर, नाग और पक्षियों में कोई ऐसा नहीं जो मेरे सेवक का मुकाबला कर सके। खर-दूषण तो मेरे ही समान बलवान थे। उन्हें भगवान् के सिवा और कौन मार सकता था?

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “शूर्पणखा का रावण के पास जाना, माया सीता” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शूर्पणखा द्वारा रावण में दुराशा जगाना, सीता का अग्नि प्रवेश और माया सीता का प्राकट्य का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
शूर्पणखा का रावण के पास जाना, माया सीता