सुनु सीता तव नाम सुमिरि नारि
सुनु सीता तव नाम सुमिरि नारि
सोरठा ५ (ख) · अरण्यकाण्ड
सोरठा पाठ
सुनु सीता तव नाम सुमिरि नारि पतिब्रत करहिं। तोहि प्रानप्रिय राम कहिउँ कथा संसार हित॥ ५ (ख) ॥
अर्थ
हे सीता! सुनो, तुम्हारा तो नाम ही ले-लेकर स्त्रियाँ पातिव्रत-धर्म का पालन करेंगी। तुम्हें तो श्रीरामजी प्राणों के समान प्रिय हैं, यह (पातिव्रत-धर्म की) कथा तो मैंने संसार के हित के लिये कही है।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “अनसूया का सीता को उपदेश” प्रकरण का सोरठा ५ (ख) है। इस प्रकरण में सीता और अनसूया के मिलन तथा अनसूया द्वारा पातिव्रत धर्म के उपदेश का वर्णन है।
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अनसूया का सीता को उपदेश