सुनि रघुपति के बचन सुहाए
सुनि रघुपति के बचन सुहाए
चौपाई १, दोहा ४५ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
चौपाई पाठ
सुनि रघुपति के बचन सुहाए। मुनि तन पुलक नयन भरि आए॥ कहहु कवन प्रभु कै असि रीती। सेवक पर ममता अरु प्रीती॥ १ ॥
अर्थ
श्रीरघुनाथजी के सुन्दर वचन सुनकर मुनि का शरीर पुलकित हो गया और नेत्र [प्रेमाश्रुओं के जल से] भर आये। [वे मन-ही-मन कहने लगे--] कहो तो किस प्रभु की ऐसी रीति है, जिसका सेवक पर इतना ममत्व और प्रेम हो।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “नारद-राम संवाद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ४५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में देवर्षि नारद और श्रीराम के बीच भक्ति, नाम-महिमा और दिव्य कृपा के गूढ़ संवाद का वर्णन है।
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नारद-राम संवाद