अवगुन मूल सूलप्रद प्रमदा सब दुख

दोहा ४४ · अरण्यकाण्ड

दोहा पाठ

अवगुन मूल सूलप्रद प्रमदा सब दुख खानि। ताते कीन्ह निवारन मुनि मैं यह जियँ जानि॥ ४४ ॥

अर्थ

युवती स्त्री अवगुणों की मूल, पीड़ा देनेवाली और सब दुःखों की खान है। इसलिये हे मुनि! मैंने जी में ऐसा जानकर तुमको विवाह करने से रोका था।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “नारद-राम संवाद” प्रकरण का दोहा ४४ है। इस प्रकरण में देवर्षि नारद और श्रीराम के बीच भक्ति, नाम-महिमा और दिव्य कृपा के गूढ़ संवाद का वर्णन है।

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नारद-राम संवाद