सुनत गीध क्रोधातुर धावा

चौपाई ८, दोहा २९ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

सुनत गीध क्रोधातुर धावा। कह सुनु रावन मोर सिखावा॥ तजि जानकिहि कुसल गृह जाहू। नाहिं त अस होइहि बहुबाहू॥ ८ ॥

अर्थ

यह सुनते ही गीध क्रोध में भरकर बड़े वेग से दौड़ा और बोला--रावण! मेरी सिखावन सुन। जानकीजी को छोड़कर कुशलपूर्वक अपने घर चला जा। नहीं तो हे बहुत भुजाओंवाले! ऐसा होगा कि-।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “जटायु-रावण युद्ध” प्रकरण का चौपाई ८, दोहा २९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में जटायु द्वारा सीताजी की रक्षा हेतु रावण से वीरतापूर्ण युद्ध और घायल होने का वर्णन है।

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जटायु-रावण युद्ध