की मैनाक कि खगपति होई

चौपाई ७, दोहा २९ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

की मैनाक कि खगपति होई। मम बल जान सहित पति सोई॥ जाना जरठ जटायू एहा। मम कर तीरथ छाँड़िहि देहा॥ ७ ॥

अर्थ

यह या तो मैनाक पर्वत है या पक्षियों का स्वामी गरुड़। पर वह (गरुड़) तो अपने स्वामी विष्णु सहित मेरे बल को जानता है! [कुछ पास आने पर] रावण ने उसे पहचान लिया [और बोला--] यह तो बूढ़ा जटायु है! यह मेरे हाथरूपी तीर्थ में शरीर छोड़ेगा।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “जटायु-रावण युद्ध” प्रकरण का चौपाई ७, दोहा २९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में जटायु द्वारा सीताजी की रक्षा हेतु रावण से वीरतापूर्ण युद्ध और घायल होने का वर्णन है।

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जटायु-रावण युद्ध