सुनहु उमा ते लोग अभागी

चौपाई २, दोहा ३३ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

सुनहु उमा ते लोग अभागी। हरि तजि होहिं बिषय अनुरागी॥ पुनि सीतहि खोजत द्वौ भाई। चले बिलोकत बन बहुताई॥ २ ॥

अर्थ

[शिवजी कहते हैं--] हे पार्वती! सुनो, वे लोग अभागे हैं जो भगवान् को छोड़कर विषयों से अनुराग करते हैं। फिर दोनों भाई सीताजी को खोजते हुए आगे चले। वे वन की सघनता देखते जाते हैं।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “कबंध उद्धार” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में कबंध के शापमुक्त होकर दिव्य गंधर्व स्वरूप प्राप्त करने का वर्णन है।

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कबंध उद्धार