संकुल लता बिटप घन कानन
संकुल लता बिटप घन कानन
चौपाई ३, दोहा ३३ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
चौपाई पाठ
संकुल लता बिटप घन कानन। बहु खग मृग तहँ गज पंचानन॥ आवत पंथ कबंध निपाता। तेहिं सब कही साप कै बाता॥ ३ ॥
अर्थ
वह सघन वन लताओं और वृक्षों से भरा है। उसमें बहुत-से पक्षी, मृग, हाथी और सिंह रहते हैं। श्रीरामजी ने रास्ते में आते हुए कबंध राक्षस को मार डाला। उसने अपने शाप की सारी बात कही।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “कबंध उद्धार” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में कबंध के शापमुक्त होकर दिव्य गंधर्व स्वरूप प्राप्त करने का वर्णन है।
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कबंध उद्धार