कोमल चित अति दीनदयाला
कोमल चित अति दीनदयाला
चौपाई १, दोहा ३३ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
चौपाई पाठ
कोमल चित अति दीनदयाला। कारन बिनु रघुनाथ कृपाला॥ गीध अधम खग आमिष भोगी। गति दीन्ही जो जाचत जोगी॥ १ ॥
अर्थ
श्रीरघुनाथजी अत्यन्त कोमल चित्तवाले, दीनदयालु और बिना ही कारण कृपालु हैं। गीध [पक्षियों में भी] अधम पक्षी और मांसाहारी था, उसको भी वह दुर्लभ गति दी, जिसे योगीजन माँगते रहते हैं।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “कबंध उद्धार” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में कबंध के शापमुक्त होकर दिव्य गंधर्व स्वरूप प्राप्त करने का वर्णन है।
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कबंध उद्धार