सुनहु उदार सहज रघुनायक

चौपाई १, दोहा ४२ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

सुनहु उदार सहज रघुनायक। सुंदर अगम सुगम बर दायक॥ देहु एक बर मागउँ स्वामी। जद्यपि जानत अंतरजामी॥ १ ॥

अर्थ

हे स्वभाव से ही उदार श्रीरघुनाथजी ! सुनिये। आप सुन्दर अगम और सुगम वर के देनेवाले हैं। हे स्वामी! मैं एक वर माँगता हूँ, वह मुझे दीजिये, यद्यपि आप अन्तर्यामी होने के नाते सब जानते ही हैं।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “नारद-राम संवाद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ४२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में देवर्षि नारद और श्रीराम के बीच भक्ति, नाम-महिमा और दिव्य कृपा के गूढ़ संवाद का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
नारद-राम संवाद