नाना बिधि बिनती करि प्रभु प्रसन्न
नाना बिधि बिनती करि प्रभु प्रसन्न
दोहा ४१ · अरण्यकाण्ड
दोहा पाठ
नाना बिधि बिनती करि प्रभु प्रसन्न जियँ जानि। नारद बोले बचन तब जोरि सरोरुह पानि॥ ४१ ॥
अर्थ
बहुत प्रकार से विनती करके और प्रभु को मन में प्रसन्न जानकर तब नारदजी कमल के समान हाथ जोड़कर वचन बोले--।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “नारद-राम संवाद” प्रकरण का दोहा ४१ है। इस प्रकरण में देवर्षि नारद और श्रीराम के बीच भक्ति, नाम-महिमा और दिव्य कृपा के गूढ़ संवाद का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
नारद-राम संवाद