सून बीच दसकंधर देखा

चौपाई ४, दोहा २८ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

सून बीच दसकंधर देखा। आवा निकट जती कें बेषा॥ जाकें डर सुर असुर डेराहीं। निसि न नीद दिन अन्न न खाहीं॥ ४ ॥

अर्थ

रावण सूना मौका देखकर यति (संन्यासी) के वेष में श्रीसीताजी के समीप आया। जिसके डर से देवता और दैत्य तक इतना डरते हैं कि रात को नींद नहीं आती और दिन में [भरपेट] अन्न नहीं खाते--।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “श्रीसीता हरण और श्रीसीता विलाप” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण द्वारा सीताजी का छलपूर्वक हरण और उनका करुण विलाप का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
श्रीसीता हरण और श्रीसीता विलाप