मरम बचन जब सीता बोला

चौपाई ३, दोहा २८ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

मरम बचन जब सीता बोला। हरि प्रेरित लछिमन मन डोला॥ बन दिसि देव सौंपि सब काहू। चले जहाँ रावन ससि राहू॥ ३ ॥

अर्थ

इसपर जब सीताजी कुछ मर्म-बचन (हृदय में चुभनेवाले वचन) कहने लगीं, तब भगवान्‌की प्रेरणा से लक्ष्मणजी का मन भी चञ्चल हो उठा। वे श्रीसीताजी को वन और दिशाओं के देवताओं को सौंपकर वहाँ चले जहाँ रावणरूपी चन्द्रमा के लिये राहुरूप श्रीरामजी थे।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “श्रीसीता हरण और श्रीसीता विलाप” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण द्वारा सीताजी का छलपूर्वक हरण और उनका करुण विलाप का वर्णन है।

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श्रीसीता हरण और श्रीसीता विलाप