सुखी मीन सब एकरस अति अगाध

दोहा ३९ (ख) · अरण्यकाण्ड

दोहा पाठ

सुखी मीन सब एकरस अति अगाध जल माहिं। जथा धर्मसीलन्ह के दिन सुख संजुत जाहिं॥ ३९ (ख) ॥

अर्थ

उस सरोवर के अत्यन्त अथाह जल में सब मछलियाँ सदा एकरस (एक समान) सुखी रहती हैं। जैसे धर्मशील पुरुषों के सब दिन सुखपूर्वक बीतते हैं।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “शबरी पर कृपा, नवधा भक्ति” प्रकरण का दोहा ३९ (ख) है। इस प्रकरण में शबरी पर प्रभु की कृपा, नवधा भक्ति उपदेश और पंपासर प्रस्थान का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
शबरी पर कृपा, नवधा भक्ति