पुरइनि सघन ओट जल बेगि न

दोहा ३९ (क) · अरण्यकाण्ड

दोहा पाठ

पुरइनि सघन ओट जल बेगि न पाइअ मर्म। मायाछन्न न देखिऐ जैसें निर्गुन ब्रह्म॥ ३९ (क) ॥

अर्थ

घनी पुरइनों (कमल के पत्तों) की आड़ में जल का जल्दी पता नहीं मिलता। जैसे माया से ढके रहने के कारण निर्गुण ब्रह्म नहीं दीखता।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “शबरी पर कृपा, नवधा भक्ति” प्रकरण का दोहा ३९ (क) है। इस प्रकरण में शबरी पर प्रभु की कृपा, नवधा भक्ति उपदेश और पंपासर प्रस्थान का वर्णन है।

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शबरी पर कृपा, नवधा भक्ति