गिरि पर बैठे कपिन्ह निहारी
गिरि पर बैठे कपिन्ह निहारी
चौपाई १३, दोहा २९ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
चौपाई पाठ
गिरि पर बैठे कपिन्ह निहारी। कहि हरि नाम दीन्ह पट डारी॥ एहि बिधि सीतहि सो लै गयऊ। बन असोक महँ राखत भयऊ॥ १३ ॥
अर्थ
पर्वत पर बैठे हुए बंदरों को देखकर सीताजी ने हरि नाम लेकर वस्त्र डाल दिया। इस प्रकार वह सीताजी को ले गया और उन्हें अशोकवन में जा रखा।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “जटायु-रावण युद्ध” प्रकरण का चौपाई १३, दोहा २९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में जटायु द्वारा सीताजी की रक्षा हेतु रावण से वीरतापूर्ण युद्ध और घायल होने का वर्णन है।
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जटायु-रावण युद्ध